Chitragupta Mantras

Divine depiction of Chitragupta

Divine depiction of Chitragupta

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श्री चित्रगुप्त जी मंत्र

मषीभाजनसंयुक्तश्चरसि त्वं ! महीतले ।
लेखनी- कटिनीहस्त चित्रगुप्त नमोऽस्तुते ॥
चित्रगुप्त ! नमस्तुभ्यं लेखकाक्षरदयकम् !
कायस्थजातिमासाधा चित्रगुप्त ! नमोऽस्तुते ॥!

ध्यानं

शान्ताकारं कमलनयनं , चित्रगुप्त सुरेशम ।
विश्वाधारं गगन सदृशं , मेघवर्णं शुभाग्ड़म ॥
इरावती दक्षिणा कान्तं ,योगिभिध्यनि गम्यम ।
वन्दे चित्र धर्मराज , सर्व लोकंक नाथम ॥

आवाहन

ॐ आगच्‍छ भगवन्‍देव स्‍थाने चात्र स्थिरौ भव ।
यावत्‍पूजं करिष्‍यामि तावत्‍वं सन्निधौ भव ।
ॐ भगवन्‍तं श्री चित्रगुप्‍त आवाहयामि स्‍थापयामि ।।

दोनो हाथ जोडकर प्रभु चित्रगुप्‍त जी से प्रार्थना कीजिये के हे प्रभु जब तक मैं आपकी पूजा करूं तब तक प्रभु आप यहां विराजमान रहिये।

श्री चित्रगुप्ता गायत्रीमंत्र

ॐ भूर्भुवः स्वः
तत्पुरुषाय विेदमहे , चित्रगुप्ताय: कीमहि
तन्नो चित्रगुप्त : प्रचोदयात् स्वः ।।

अर्थ :- हम सर्व रक्षक प्रभु प्राणस्वरुप​, दुख विनाशक सुख स्वरुप भगवान चित्रगुप्त को भली भान्ति जानते है । उन कायस्थ श्रेष्ठ का ध्यान करते है । वे चित्रगुप्त भगवन हमे शुभकार्यो मे प्रेरित करे ॥

श्री चित्रगुप्त जप – मंत्र

ॐ नमो विचित्राय धर्मलेखाकाय
यमवाहिकादिकारणी मृत्यु- जन्म सयुत्प्रलयम कथय कथय स्वाहा

अर्थ :- जो फल १०० अश्वमेघ यन्त्र करने का ,बार बार गंगा स्नान करने का,सूर्य और चन्द्रगृहण पर प्रयाग स्नान करने का होता है वही फल भगवान चित्रगुप्त के इस जप​-मंत्र से होता है॥

श्री चित्रगुप्ता अरोग्य मंत्र

ॐ नमः चित्रगुप्ताय शान्ताय सर्व रोग विनाशने
आयु आरोग्यं एश्यर्यं देहि देवँ जगत्पये

अर्थ :- यदि किसी परिवार मे गरीवी आई हो, दुखमय जिन्दगी गुजर कर रही हो, वेकारी का समाना कर रहा होन और वैवाहिक कार्य सम्पन्न न हो पा रहा है। तो इस चमत्कारी अरोग्य मत्रं का जप करने से सारे कष्ट दुर हो जाते है ।

श्री चित्रगुप्त वंदना

पंकज समान सूचि-सुंदर मृदुल तन,पंकज समान मुख-दृग रतनोर है |
साम दंड,भेद,पत्र लेखनी दवात,न्याय निती, आयुधादी नित्य कर धारे है |
वंदन करत जोहि,सुर,नर,मुनि सब,चित्र-रवि,धर्मराज नाम,सो उबारे है |
ब्रह्मा-वंशज,सुधीन्द्र गुण,ज्ञान विधि,,ध्यावत ही पाप-पुंज नाशत हमारे है |

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