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पुत्र प्राप्ति के उपाय | Putra Prapti ke Upay

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पुत्र प्राप्ति के लिए उपाय

एक समय था जब लोग अपने परिवार के लिए लड़कों को आवश्यक मानते थे। और लड़कियों को उनसे कम समझते थे। हालाकि अब इस सोच में वहुत बड़ा परिवर्तन देखने को मिलता है। और अब लोग लड़कियो और लड़को को समान रूप से देखने नगे है। ऐसा आपको सामान्यता देखने को मिल जायेगा कि वहुत से दंपत्ति पुत्र सुख व बहुत से पुत्री सुख से वंचित रह जाते है और वो मन ही मन ऐसी कामना करते है कि उनको एक पुत्र अथवा पुत्री का सुख मिल जाये ताकि उनका परिवार पुत्र और पुत्री सुख दोनो का आनन्द ले सके।

संतानसुख से वंचित होने के दुख की कल्पना केवल संतानहीन दंपत्ति ही कर सकते। पुराने समय के ऐसे कई उपाय है जिनको जानकर हम संतान सुख की प्राप्ति कर सकते है। इन उपाओं को जानकर आप न केवल संतानसुख प्राप्त कर सकते है वल्कि मनचाही संतान पा सकते हैं यदि आप पुत्री सुख चाहते हैं तो आपके यहाॅ पुत्री हो सकती है और यदि आप पुत्र सुख की कामना करते है तो आप वह भी आसानी से पा सकते है।

महिलाओ को पीरियेड होने पश्चात के कुछ दिनों होते हैं जिनमें महिलाये गर्भवती होती है तो वे पुत्र को जन्म देती है और कुछ अन्य निश्चित दिनों में महिलाओं का गर्ववती होने पर पुत्री योग बनता है। पीरिएड के पश्चात के हर दिन की अपनी विषेशता होती है जिनसे पुत्र और पुत्री के गुण व अवगुण निर्धारित होते है।

आइये महिलाओं के गर्भ धारण से सम्बन्धित कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों को जानते है

ऐसा माना जाता है यदि महिला पीरिएड होने वाले दिन से चैथी, छठी, आठवी, दसवीं, बारहवीं, चैधवीं तथा सालहवीं रात्री में गर्भवती होती है तो वह पुत्र को जन्म देती है। इसी तरह यदि महिलायें पाॅचवी, सातवीं, नौवी, गयाहवीं, तेरहवीं, तथा पंद्रवीं रात्री को गर्भवती होती है तो उन्हें पुत्री प्राप्त होती है।

  1. चैथी से सोलहवीं रात्री तक महिलायें जिस रात्री को गर्भवर्ती होती है बच्चे में गुण व अवगुण उसी अनुसार आते है यदि महिला चैथी रात्री को ही गर्भवती हो जाती है तो ये बेटे को जन्म देने वाला योग होता है परन्तु ऐसा माना जाता है इस वालक की आयु कम होती है।
  2. इसी प्रकार यदि महिला पाॅचवी रात्री को गर्भवती होती है तो यह वेटी को जन्म देने का योग है ऐसा भी माना जाता है यह संतान विवाह पश्चात केवल लड़कियों की जन्म देगी ।
  3. जैसा कि हम पहले ही बता चुके हैं कि छठी रात्री को गर्भवती हुई महिला पुत्र को जन्म देती है। लेकिन इस पुत्र की आयु औसत होती है अर्थात इस बालक की आयु न तो बहुत अधिक होगी और न ही बहुत कम।
  4. महिलाओं का सातवीं रात में गर्भवती होना इस ओर संकेत करता है कि वह वेटी को जन्म देगी और यह संतान भविष्य में बच्चे को जन्म देने में अस्मर्थ होगी।
  5. अगर हम आॅठवीं रात्री की बात करें तो यह रात्री दंपत्ति के बहुत महत्वपूर्ण होती है क्योकि इस रात्री को यदि महिला गर्भवती होती है तो वह ऐश्वर्यशाली पुत्र को जन्म देती हैं जो उनका मान व सम्मान भविष्य बढ़ाता है।
  6. नौवीं रात्री भी आॅठवीं रात्री समान महत्वपूर्ण होती होती फर्क सिर्फ इतना है आॅठवी का गर्भवती होने से ऐश्वर्यशाली पुत्र होता और नौवीं को ऐश्वर्यशालिनी पुत्री होती है।
  7. दसवीं रात्री भी महत्वपूर्ण है इस रात्री को महिला का गर्भवती होना यह बताता है कि आने वाला मेहमाम वेटा होगा और वह बहुत चतुर भी होगा।
  8. 11वीं रात्री को गर्भवती हुई महिला मान्यतानुशार पुत्री को जन्म देती है एंसा भी मान्यता है यह संतान चरित्रहीन होती है।
  9. बारहवीं रात्रीं को यदि महिला गर्भवती होती है तो मान्यतानुशार पुत्र को जन्म देती है। यह पुत्र बड़ा होकर उत्तम पुरूष बनता है।
  10. तेरहबीं रात्री में महिला गर्भवती होती है तो वह एक ऐसी वेटी को जन्म देती है जो कि वर्णसंकर होती है।
  11. चैधवीं रात्री में महिला होना होना बेटे की ओर इशारा करता है और बेटा उत्तम गुणों से परिपूर्ण होता है।
  12. पन्द्रहवीं रात्री वेटी को जन्म देने का योग बनाती है। यह वेटी भी बहुत ही भाग्यशाली होती है।
  13. सोलहवीं रात्री एक ऐसी महत्वपर्ण रात्री मानी जाती है जिसमें यदि महिला गर्भवती होती है। है तो वह सर्वगुण सम्पन्न पुत्र को जन्म देती है।

अगर दंपत्ति इन रात्रियों की विशषाओं को ध्यान में रखता है तो वह मनचाही संतान सुख आसानी प्राप्त कर सकता है। और अपने जीवन में खुशियों का आनन्द ले सकता है।

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