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ग्रहण के दिन क्या करें, क्या नहीं करना चाहिए | Do’s & Don’ts for Grahan (Hindi)

ग्रहण के दिन क्या करें, क्या नहीं करना चाहिए?

ग्रहण के सूतक और ग्रहणकाल में स्नान, दान, जप-पाठ, मन्त्र, स्तोत्र-पाठ, मन्त्र-सिद्धि, तीर्थस्नान, ध्यान, हवनादि शुभ कार्यों का अनुष्ठान करना अत्यंत शुभ होता है | धार्मिक लोगों को ३१ जनवरी को सूर्यास्त के पूर्व ही अपनी राश्यानुसार अन्न, जल, चावल, सफ़ेद वस्त्र, फलों आदि अथवा ब्राह्मण परामर्शानुसार दान योग्य वस्तुओं का संग्रह करके संकल्प कर लेना चाहिए तथा ग्रहण मोक्ष (८.४१ रात्रि) के बाद अथवा अगले दिन १ फरवरी २०१८ को प्रातः सूर्योदय के समय पुनः स्नान करके संकल्पपूर्वक ब्राह्मण को दान देना है |

सूतक एवं ग्रहणकाल में मूर्ति स्पर्श, अनावश्यक खाना पीना, मैथुन, निद्रा, तैलाभ्यंग वर्जित है | झूट, कपटादि, वृथा-अलाप, मूत्र-पुरुषोत्सर्ग, नाख़ून काटने आदि से परहेज़ करें | वृद्ध, रोगी, बालक एवं गर्भवती स्त्रियों को यथानुकूल भोजन या दवाई आदि लेने में कोई दोष नहीं है |

गर्भवती महिलाओं को ग्रहणकाल में सब्जी काटना, पापड-सेकना आदि उत्तेजित कार्यों से परहेज़ करें | इस समय, गर्भवती महिलाओं धार्मिक ग्रन्थ का पाठ करते हुए प्रसन्नचित्त रहे | इससे भावी संतान स्वास्थ्य एवं सद्गुणी होती है | हरिद्वार, प्रयाग, वाराणसी आदि तीर्थों पर स्नानादि का विशेष माहात्म्य होगा |

ग्रहण में स्पर्श के समय स्नान, मध्य में होम और देवपूजन, और ग्रहणमोक्ष के समय श्राद्ध और अन्न, वस्त्र, दानादि का दान और सर्वमुक्त होने पर स्नान करें |

ग्रहण या सूतक से पहले ही दूध/दही, आचार, चटनी, मुरब्बा में कूशत्रुन रख देना श्रेयस्कर माना जाती है | इससे यह दूषित नहीं होंगे | सूखे खाद्य पदार्थों में कुशा डालने की आवश्यकता नहीं है |

रोग शांति के लिए ग्रहणकाल में ‘श्री महामृत्युंजय मंत्र’ का जप करना शुभ होगी |

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