नक्षत्र और शरीर के अंग | Nakshatra aur Shareer Ke Ang | किस नक्षत्र शरीर की किस अंग को प्रतिनिधित्व करती है

नक्षत्र और शरीर के अंग, Nakshatra aur Shareer Ke Ang. किस नक्षत्र शरीर की किस अंग को प्रतिनिधित्व करती है. वैदिक ज्योतिष में नक्षत्रों को भी शरीर के आधार पर वर्गीकृत किया गया है. सभी नक्षत्र शरीर के किसी ना किसी अंग का प्रतिनिधित्व करते ही हैं और इन अंगों से संबंधित परेशानी भी व्यक्ति को हो जाती हैं. […]

तीन ग्रहों की युति के फल | Teen Grahon Ki Yuti Ke Phal

Teen Grahon Ki Yuti ke Phal, तीन ग्रहों की युति के फल – विभिन्न ग्रहों की युति-प्रतियुति के क्या फल हो सकते है? तीन ग्रहों की युति के परिणाम और फल – इस प्रकार होती है.. १. सूर्य+चन्द्र+बुध=माता-पिता के लिये अशुभ। मनोवैज्ञानिक। सरकारी अधिकारी। ब्लैक मेलर । अशांत। मानसिक तनाव। परिवर्तनशील। २. सूर्य+चन्द्र +केतू=रोज़गार के लिये परेशान। न […]

स्कंदमाता | स्कंदमाता नवदुर्गा | स्कंदमाता की कहानी | माँ स्कंदमाता की माहात्म्य | स्कंदमाता उपासना

नवरात्रि का पाँचवाँ दिन स्कंदमाता की उपासना का दिन होता है। मोक्ष के द्वार खोलने वाली माता परम सुखदायी हैं। माँ अपने भक्तों की समस्त इच्छाओं की पूर्ति करती हैं। सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया | शुभदाऽस्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी || इस देवी की चार भुजाएँ हैं। यह दायीं तरफ की ऊपर वाली भुजा से स्कन्द […]

कूष्माण्डा | कूष्माण्डा नवदुर्गा | कूष्माण्डा की कहानी | माँ कूष्माण्डा की माहात्म्य | कूष्माण्डा उपासना

नवरात्र-पूजन के चौथे दिन कुष्माण्डा देवी के स्वरूप की उपासना की जाती है। इस दिन साधक का मन ‘अनाहत’ चक्र में अवस्थित होता है। अतः इस दिन उसे अत्यंत पवित्र और अचंचल मन से कूष्माण्डा देवी के स्वरूप को ध्यान में रखकर पूजा-उपासना के कार्य में लगना चाहिए। जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था, तब […]

संतान प्राप्ति के प्रयोग करें जन्माष्टमी के दिन | Childless Couple ke liye Achuk Upay

श्री कृष्णा जन्माष्टमी संतान प्राप्ति की कामना हेतु प्रयोग के लिए एक अद्भुत अवसर है| श्रवण पूर्णिमा के बाद कृष्णा पक्ष अष्टमी दिन मानते है श्री कृष्णा जन्माष्टमी पर्व. यह पर्व उन लोगों के लिए विशेष मुहूर्त का दिन भी है, जो संतान की अभिलाषा रखते है और इस हेतु कोई साधना या प्रयोग या […]

चार-युग की विशेषताएं | Char Yug Vishesh | सत्ययुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग, कलियुग

चार-युग और उनकी विशेषताएं ‘युग’ शब्द का अर्थ होता है एक निर्धारित संख्या के वर्षों की काल-अवधि। जैसे सत्ययुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग, कलियुग आदि । यहाँ हम चारों युगों का वर्णन करेंगें। युग वर्णन से तात्पर्य है कि उस युग में किस प्रकार से व्यक्ति का जीवन, आयु, ऊँचाई, एवं उनमें होने वाले अवतारों के बारे […]

Shukravar Vrat Katha in Hindi | शुक्रवार व्रत कथा

शुक्रवार के दिन मां संतोषी का व्रत-पूजन किया जाता है, जिसकी कथा इस प्रकार से है- एक बुढिय़ा थी, उसके सात बेटे थे. 6 कमाने वाले थे जबकि एक निक्कमा था. बुढिय़ा छहो बेटों की रसोई बनाती, भोजन कराती और उनसे जो कुछ झूठन बचती वह सातवें को दे देती. एक दिन वह पत्नी से […]

लव मैरिज टोटके | Love Marriage Totke | प्रेम विवाह के लिए आसान उपाय

Lord Shiva, Goddess Parvati

लव मैरिज में अक्सर कोई कोई न अड़चन रूकावट आती ही है। ऐसे विवाह में लड़का और लड़की दोनो ही तरह के लोग विवाह के लिए राज़ी होते हैं। ऐसे में प्रेम करने वाले युगल के सामने गम्भीर समस्या होती है कि वे क्या करें ताकि दोनो तरफ के लोगों को विवाह के लिए मनाया […]

नौकरी पाने के टोटके | Job Totke | नौकरी, प्रमोशन के लिए अचूक टोटके

नौकरी पाने के टोटके | Job Totke | नौकरी, प्रमोशन के लिए अचूक टोटके | Remedies to get job, promotion in Hindi. हम सभी नौकरीपेशा के सामने कोई न कोई परेशानि लगी रहती है कभी हमारी प्रमोशन रूक जाती है तो कभी नौकरी छूट जाती है। या जो जहाॅ जाॅब कर रहे है वह आपको […]

पितृ दोष के लिए ज्योतिषीय योग, कैसे बनती है पितृ दोष | Pitru Dosh – Jyotish Yog

पितृ दोष के लिए ज्योतिषीय योग, पितृ दोष क्या होती है? कैसे बनती है पितृ दोष? पितृ दोष की कारण.. 1. लग्नेश की अष्टम स्थान में स्थिति अथवा अष्टमेष की लग्न में स्थिति। 2. पंचमेश की अष्टम में स्थिति या अष्टमेश की पंचम में स्थिति। 3. नवमेश की अष्टम में स्थिति या अष्टमेश की नवम […]

जन्म से मृत्यु तक कुंडली के 12 भाव | Kundli ke 12 Bhav

जन्म से मृत्यु तक कुंडली के 12 भाव मनुष्य के लिए संसार में सबसे पहली घटना उसका इस पृथ्वी पर जन्म है, इसीलिए प्रथम भाव जन्म भाव कहलाता है। जन्म लेने पर जो वस्तुएं मनुष्य को प्राप्त होती हैं उन सब वस्तुओं का विचार अथवा संबंध प्रथम भाव से होता है जैसे-रंग-रूप, कद, जाति, जन्म […]

कुण्डलिनी शक्ति – चक्र जागरण के मंत्र | Kundalini Shakti – Chakr Jagaran Ke Mantra

कुण्डलिनी शक्ति – चक्र जागरण के मंत्र | Kundalini Shakti – Chakr Jagaran Ke Mantra.. मनुष्य शरीर स्थित कुंडलिनी शक्ति में जो चक्र स्थित होते हैं उनकी संख्या सात बताई गई है। यह जानकारी शास्त्रीय, प्रामाणिक एवं तथ्यात्मक है- (1) मूलाधार चक्र – गुदा और लिंग के बीच चार पंखुरियों वाला ‘आधार चक्र’ है । आधार चक्र का ही एक […]

दिक्पाल पत्नीओ के नाम | Dikpal Patniyon Ke Naam

दिक्पाल पत्नीओ के नाम| 1. प्राच्याम्:- इन्द्र – शची 2. आग्नेयाम्:- अग्नि – स्वाहा 3. दक्षिणस्याम्:- यम – श्यामला 4. नैऋत्याम्:- निर्रुति – तामसी 5. पश्चिमायाम्:- वरुण – भागीरथी 6. वायव्याम्:- वायु – भारती 7. उदीच्याम्:- सोम – रोहिणी 8. इशान्याम्:- इशान – पार्वती 9. उर्ध्वायाम्:- ब्रह्मा – सावित्री 10. अधःस्थायां :- अन्नत – वारुणी

हरछठ

हरछठ पूजा ( हलषष्ठी) यह त्यौहार भादों कृष्ण पक्ष की छठ को मनाया जाता है। इसी दिन श्री कृष्ण के बड़े भाई बलराम का जन्म हुआ था। यह व्रत केवल पुत्रवती महिलाएं करती हैं। इस व्रत में पेड़ों के फल बिना बोया अनाज आदि खाने का विधान है।केवल पड़िया (भैंस का बच्चा ) वाली भैंस […]

राधाष्टमी पूजन

सनातन धर्म में भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि श्री राधाष्टमी के नाम से प्रसिद्ध है। शास्त्रों में इस तिथि को श्री राधाजी का प्राकट्य दिवस माना गया है। श्री राधाजी वृषभानु की यज्ञ भूमि से प्रकट हुई थीं। वेद तथा पुराणादि में जिनका ‘कृष्ण वल्लभा’ कहकर गुणगान किया गया है, वे श्री […]

रविवार व्रत कथा | Ravivar Vrat Katha in Hindi

प्राचीन काल में एक बुढ़िया रहती थी. वह नियमित रूप से रविवार का व्रत करती. रविवार के दिन सूर्योदय से पहले उठकर बुढ़िया स्नानादि से निवृत्त होकर आंगन को गोबर से लीपकर स्वच्छ करती, उसके बाद सूर्य भगवान की पूजा करते हुए रविवार व्रत कथा सुन कर सूर्य भगवान का भोग लगाकर दिन में एक […]

Vat Savitri Vrat Katha in Hindi

Here is the story of Vat Savitri Vrat in Hindi. Vat Savitri Vrat Katha is mentioned in the Mahabharata as a conversation between King Yudhishtira and Markandeya. The story of Vat Savitri Vrat goes like this… सावित्री और सत्यवान की कथा सबसे पहले महाभारत के वनपर्व में मिलती है। जब युधिष्ठिर मारकण्डेय ऋषि से पूछ्ते […]

Guruvar Vrat Katha in Hindi | Brihaspati Vaar Vrat Katha in Hindi

Guruvar Vrat Katha in Hindi, Story of Brihaspati Vaar Vrat in Hindi is explained here along with the Brihaspati Bhagavan Katha. वृहस्पतिवार (गुरुवार व्रत) कथा प्राचीन समय की बात है– एक बड़ा प्रतापी तथा दानी राजा था, वह प्रत्येक गुरुवार को व्रत रखता एवं पून करता था. यह उसकी रानी को अच्छा न लगता. न […]

कैसे हुए शनिदेव लंगड़े | How Shani became Lame

पिप्पलाद मुनि की बाल्यावस्था में उनके पिता का देहावसान हो गया था | यमुना के तट पर तपस्वी जीवन व्यतीत करने वाले उनके पिता को शनि ने अत्यधिक कष्ट दिया था | विपन्नता और व्याधि के निरंतर आक्रमण से पिप्पलाद मुनि के पिता के प्राण चले गए थे | उनकी माता अपने पति की मृत्यु […]

आश्लेषा नक्षत्र फलम 2020-21 | आश्लेषा नक्षत्र भविष्य 2020-2021

आश्लेषा नक्षत्र सनातन ज्योतिष क्षेत्र की २७ नक्षत्र चक्र में नौवाँ नक्षत्र है | नक्षत्र के अनुसार कर्क राशि: पुनर्वसु नक्षत्र का चौथा चरण; पुष्य नक्षत्र का चारों चरण; आश्लेषा नक्षत्र का चारों चरण | आश्लेषा नक्षत्र भविष्य अप्रैल 2020 बॉस के द्वारा आपको एक चेतावनी मिलने की आशंका है| आपको इस माह अस्त्र भीति […]