Ujjain Mahakal Temple MahaShivaratri 2020 Live Online

Ujjain Mahakaleshwar 23

Ujjain Mahakaleshwar 23

Ujjain Mahakal Mandir is one of the Jyotirling Temples and the second busiest Shiva Temple after Varanasi Vishwanath Mandir. Mahashivaratri is one of the most celebrated festivals in Ujjain Mahakal Mandir. In 2020, Mahashivratri date is February 21. You can watch Ujjain Mahakal Mandir MahaShivratri celebrations live online…

Mahakaleshwar Navratri is an important festival of 9-nights celebrated in Ujjain Mahakaleshwar Temple (Jyotirlinga Temple), Madhya Pradesh. It is celebrated during Maha Shivaratri festival.

In 2020, Mahakaleshwar Navratri begins on February 13 and ends on February 21 (Mahashivratri day).

Mahakaleshwar Jyotirlinga is one of the most famous Shiva Temples and is one of the Dwadasha Jyothirlinga Temples (12 ancient and most sacred temples dedicated to Lord Shiva).

During Mahakaleshwar Navratri, Lord Mahakaal (Shiva) is decked in different attires (Shrungar) on each day. Shrungar is a ritualistic procedure of decoration to Lord Mahakaal.

Ujjain Mahakaleshwar Temple is located on the side of the Rudrasagar lake. Mahakaleshwar Shivalingam is believed to be Swayambhu (Self manifested). The consort for Mahakaal is Goddess Mahakali.

Other famous festivals celebrated in Ujjain Mahakaal temple are – Sharad Navratri, Diwali, Sawari Yatra on Mondays in Shravan Month, Harihara Milana on Baikunta Chaturdashi in Kartik Month and Narmada Jayanti.

ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में 13 फरवरी से शिवनवरात्रि उत्सव मनाया जाएगा। भक्तों को नौ दिन तक संध्या आरती में दूल्हा बने राजा महाकाल के नौ अलग-अलग रूपों के दर्शन होंगे। मंदिर के गर्भगृह में प्रतिदिन सुबह 9.30 से दोपहर 1 बजे तक विशेष अनुष्ठान होगा। 21 फरवरी को महाशिवरात्रि पर रातभर महापूजा होगी। 22 फरवरी को तड़के 4 बजे भगवान के शीश सवा मन फूल व फलों से बना मुकुट (सेहरा) सजाया जाएगा।

मंदिर प्रशासक सुजानसिंह रावत ने बताया कि 13 फरवरी को शिवनवरात्रि का शुभारंभ होगा। पहले दिन भगवान महाकाल को सोला व दुपट्टा और जलाधरी पर मेखला धारण कराई जाएगी। चांदी के मुकुट व मुंडमाला से आकर्षक श्रंगार कर शीश पर चांदी का छत्र सजाया जाएगा।

14 फरवरी को भगवान शेषनाग, 15 फरवरी को घटाटोप, 16 फरवरी को छबीना, 17 फरवरी को होलकर, 18 फरवरी को मनमहेश, 19 फरवरी को उमा महेश तथा 20 फरवरी को शिव तांडव रूप में भगवान महाकाल के दर्शन होंगे। 21 फरवरी को दिनभर भगवान के शीश जलधारा प्रवाहित की जाएगी। 22 फरवरी को तड़के 4 बजे से सुबह 10 बजे तक भगवान के सप्तधान रूप में सेहरा दर्शन होंगे।

25 फरवरी को पंच मुखारविंद दर्शन

मंदिर की परंपरा अनुसार महाशिवरात्रि के बाद चंद्र दर्शन की दूज पर भगवान महाकाल के पंच मुखारविंद रूप में दर्शन होंगे। साल में एक बार होने वाले इस रूप में दर्शन में भक्तों को एक साथ भगवान के पांच रूप में दर्शन होते हैं।

11 ब्राह्मण प्रतिदिन करेंगे एकादश-एकादशिनी रुद्राभिषेक

शिवनवरात्रि में प्रतिदिन सुबह 9.30 से दोपहर 1 बजे तक 11 ब्राह्मण भगवान महाकाल के पूजन अभिषेक के बाद एकादश-एकादशिनी रूद्राभिषेक करेंगे। पश्चात भोग आरती होगी। प्रतिदिन शाम 5 बजे होने वाली संध्या पूजा शिव नवरात्रि में दोपहर 3 बजे होगी।

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