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Story of Shambuka Vadha by Rama (Rama killing Shambuka)

Lord Rama

Lord Rama

What is the Story of Shambuka Vadha by Rama (Rama killing Shambuka)? Padma Purana mentions the story of Shambuka Vadha as a conversation between Bhisma and Pulastya.

Shambuka Vadha story goes like this..

After killing the demons king Ravana, Sri Rama returned to Ayodhya. Many sages had arrived there to bless him on the occasion of his crowning ceremony. Sage Vashishtha was one of them.As Sri Rama was conversing with the sages a brahmin arrived there with the corpse of his son and wailed—“O son! Your death is certainly due to some flaw of Sri Rama. Now, your mother and I have decided to give up our lives as there is no point in living.”

Sri Rama’s heart was filled with grief and he asked Sage Vashishtha as to how the brahmin could be helped. Sage Vashishtha revealed to Sri Rama that the brahmin’s son had died a premature death because of Shambuk. Vashishtha said–“Shambuk is a Shudra by birth, but he is doing an austere penance. Shudras are not entitled to do penance in all the three yugas, except the Kali Yuga. So, only his death can bring back the brahmin’s son alive.”

Sri Rama instructed both his younger brothers – Lakshman and Bharata, to look after the state’s affairs in his absence and went in search of Shambuk boarded on his Pushpak Vimana. Sri Rama saw a man doing penance at the shore of a reservoir. He landed his Pushpak Vimana and went near that man. He introduced himself and enquired about the man’s identity. Sri Rama asked–Why are you doing such an austere penance. Who are you?

Without moving the man replied that he was a shudra named Shambuk. He said— I am desirous of attaining to devaloka and hence I am doing this penance. Sri Rama took out his sword and severed Shambuk’s head. All the deities hailed Sri Rama and the brahmin’s child became alive once again.

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  1. Richard Saxe Coburg says:

    Ram killed a low caste becasue he was scholarly and knew of what only the Brahmins were supposed to. Keeping the caste system in tact, this 'maryada purshottam'. Typical Hindu stuff which led to Muslims coming in and killing eveyone as no unity. Serves you right.

  2. RancY OshO says:

    RamA He WaS ThE BiggesT MotheR FuckeR Of HiS LifE . I Am RoyaL ChamaR AnD i ProuD To Be a ChamaR . He WasnT MaryadA PurshotaM . He WaS FuckinG RacisT AsS .

  3. Apt Reply says:

    India still survives and the hindu still survives. England has been whittled to a no power. When India was thriving, you were monkeys in your nation. Muslims came in and were absorbed in – despite everything and a few glitches on – hindus and muslims will live happily hear. We have seen your queen going bankrupt and your nation slowly slipping into abyss.

  4. Dev says:

    To preserve their dharma and to help Brahmins, Sri Rama and Lord Krishna could kill any Shudra without any logic ideology. Those were the teachings Ramayana and Bhagvathgeetha. Let God only help such religion where seventy percent of the Hindu population are not aware of their identity.

  5. Manne Narender says:

    Indrajeet died before Ravana . Ravana is father of Indrajeeth so Indrajeeth also Premature death how?

  6. Suraj says:

    What are u so proud of?being in position of judge to judge who cant be judge by anyone as no one have such strength to take right decesion like him. I dont support cast system but the person what he was doing was with wrong intension and u should not forget shabari she was the great devotee and even ram was bound to go and see her as she was having all kind of bhakti.and i dont need to tell what happen and who she was. Seek well to know what wrong intention was he having thats why he was killed

  7. Ravindran says:

    # often I wonder if karma decides Caste ND death ,how pre mature death of so called holy ones with immaculate birth died 2. For all reasons Attribution and consipiracy theory is woven.3. such a travesty God’s plays side kicks to the king , just because king nd blighting it as Kaliyug. Demeaning others life to no avail based on Caste. Above all who has to define Dharma – Manu ,Victor or vanquished.?

    No offence plz.I doubt kamba Ramayana recounts this.

  8. santoshkumar says:

    Ravana is a Brahman by caste.its due to their deeds they punished.not because of caste

  9. tilak says:

    killing sudras or sudras king is common In hindu religion ……..more over he is not god…

    • Anil says:



      मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने शम्बूक का वध क्यों किया? इस घटना की वास्तविकता क्या है?


      राम के काल में ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र नामक सामाजिक जातियाँ थीं ही नहीं और न इनका निर्धारण जन्मना होता था। यह साधना की आन्तरिक क्षमताओं का नामकरण था। जिस प्रकार आजकल आई.ए. एस, पी.सी.एस. का चयन है, उसी प्रकार साधनात्मक प्रशिक्षण का आरंभिक चरण शूद्र है। यह भजन की प्राथमिक सीढ़ी है। करोड़ों में से कोई भाग्यवान इस सोपान पर आरोहण करता है।

      रामराज्य में एक शूद्र भूल कर बैठा। उसका नाम शम्बूक था। वह एक वृक्ष की शाखा में सिर नीचे और पैर ऊपर कर तपस्यारत था। उसने इस तरह तपस्या आरम्भ की कि ब्राह्मण बालक मर गया। रामराज्य में तहलका मच गया कि यह हुआ कैसे? ऋषि-महर्षियों ने खोजना शुरू किया। अनुमान किया कि कोई शूद्र तपस्या कर रहा है; किन्तु वे उसे देख नहीं पाये। राम ने उसे खोज निकाला और उससे पूछा- क्या कर रहे हो? शम्बूक बोला कि मैं सदेह धाम जाना चाहता हूँ अर्थात् शरीर रहते स्वरूप को पाना चाहता हूँ। राम आपका कल्याण हो। मैं शूद्र हूँ। राम ने तलवार निकाली, उसे पेड़ से गिरा दिया। शम्बूक के शिरोच्छेदन के साथ ही वह ब्राह्मण बालक जी गया। देवताओं ने दुन्दुभियाँ बजाईं। बिगड़े हुए धर्म की पुनर्स्थापना हो गयी।

      क्या सर्जरी थी! ऐसा इलाज कभी सुना नहीं गया। न जाने कब का मरा ब्राह्मण बालक जी गया। क्या ऐसा सम्भव है कि आपका गला काट दें और दूसरा जीवित हो जाय? शूद्र को मार दें और ब्राह्मण पुनर्जीवित हो जाय? आपके यहाँ कोई पण्डित दिवंगत हो गया हो तो एक शूद्र को मारकर देख सकते हैं कि वह जीवित होता है या नहीं? वास्तव में क्या है यह शम्बूक प्रकरण?

      वस्तुतः रामायण या रामचरित मानस रहस्यमय ग्रन्थ है। इसके सभी कथानकों के अर्थ (प्रत्यक्षतः) अभिधा में खोजेंगे तो आप भटकते रह जायेंगे। उदाहरण के लिए रामायण में है कि सीता की शुद्धता की परीक्षा के लिए उन्हें अग्नि में डाला गया। अग्नि शान्त होने पर वही सीता बाहर निकल आयीं। आज भी आप इस विधि का प्रयोग कर देखें। क्या कोई इस विधि से जीवित रह सकता है? लोग कहते हैं राम ने नरलीला की अर्थात् प्राकृत आदमी जैसा करते हैं वैसा आचरण किया। तब तो यह सामान्य मनुष्य के लिए सम्भव है। आप शुद्धता की परीक्षा में कुँआरी कन्या को ही अग्नि में डालकर देखें। जब वह लौटकर आ जाय तो प्रायः सभी मान लेंगे। क्या है सीता की अग्नि-परीक्षा?

      सीता की अग्नि-परीक्षा, शम्बूक प्रकरण का आध्यात्मिक रूपक हैं। शास्त्र दो दृष्टियों से रचा जाता है। एक इतिहास को कायम रखना जिससे लोग पूर्वजों के पदचिन्हों पर चल सकें, आदर्श जीवन जी सकें। लेकिन केवल कुशलतापूर्वक जी-खा लेने से हम सबका कल्याण सम्भव नहीं है, कर्तव्यों की पूर्ति सम्भव नहीं है, इसलिए शास्त्र में दूसरा पहलू है अध्यात्म। हर जीव माया के आश्रित है। इसे माया के चंगुल से निकालकर जो आत्मा के अधिकृत भूमि में खड़ा कर दे, भगवान् उठाये-बैठायें, चलाये-सिखायें — उसका नाम अध्यात्म है। पूरी की पूरी रामायण अध्यात्म है। इसका दूसरा नाम रामचरित मानस है- राम के वे चरित्र जो आपके अन्तःकरण में प्रवाहित हैं। वे हैं सबमें किन्तु दिखायी नहीं देते। आये दिन लोभ के चरित्र, मोह के चरित्र, काम के चरित्र, क्रोध के चरित्र ही दिखाई देते हैं। अब वे प्रसुप्त रामचरित किस प्रकार आपके अन्तःकरण में जागृत होते हैं, जागृत होकर किस प्रकार रामपर्यन्त दूरी तय कराते हैं, राम की स्थिति आपको दिला देते हैं, वहाँ तक का साधन-क्रम इस रामायण में अंकित है। साधना पकड़ी ही नहीं तो श्रेणी किसने दी?

      शम्बूक प्रकरण में भगवान् राम न्यायकर्त्ता थे। अवध के सुख को त्यागकर भगवान् के साथ छाया की तरह चलनेवाले लक्ष्मण एक दिन न्याय की तुला पर चढ़ गये तो राम ने ऐसे लक्ष्मण का भी त्याग कर दिया। इसी प्रकार सीता जैसी सहधर्मिणी भी न्याय की कसौटी पर आयी तो राम ने जनहित पर ही ध्यान दिया। इतना ही नहीं उन्होंने अपने-आप को भी दण्डित किया, वे न्यायपीठ का सम्मान करने के लिए सिंहासनासीन हो जाते थे अन्यथा वे कुश की चटाई का ही प्रयोग करते थे। उनकी मान्यता थी कि सीता यदि पर्णशैय्या पर शयन करती हैं तो उन्हें भी मसृण शैय्या के उपयोग का कोई अधिकार नहीं है। राम ने तो कुत्ते के आरोप पर एक तपस्वी को दण्डित किया था। इतने न्यायप्रिय सम्राट के लिए क्या यह उचित होता कि प्रजा में किसी एक ने भूल कर दी तो उसे छाती से लगाते? क्या न्यायाधीश भी पक्षपात करता है?

      क्या रामराज्य में आज की तरह आरक्षण व्यवस्था थी? नहीं, राम के राज्य में केवल एक आरक्षण था- सर्वांगीण सुख और अक्षय धाम। आज एक को आरक्षण देते हैं तो दूसरा खून के आँसू रोता है।

      ‘नहिं दरिद्र कोउ दुखी न दीना।
      नहिं कोउ अबुध न लच्छन हीना।।’

      राम के राज्य में दरिद्र कोई नहीं था, सभी समृद्ध थे। दुःखी कोई नहीं था। सभी प्रबुद्ध थे, अशिक्षित कोई नहीं था तो कोटा कैसा? सिद्ध है कि राम के काल में बाहर समाज में वर्ण-व्यवस्था के नाम पर मनुष्य का विभाजन नहीं था। जब बाहर वर्ण थे ही नहीं तो रावण ने किस शूद्र को मारा? स्पष्ट है कि शम्बूक के प्रश्न का कोई सामाजिक सन्दर्भ अथवा भौतिक धरातल नहीं है। विचारणीय है कि रामायण के शम्बूक प्रकरण का आशय क्या है?

      शम्बूक का अर्थ है समत्व की वृत्ति का स्वांग करनेवाला। शूद्र साधना का प्रथम चरण है। वह अल्पज्ञ होता है। वह दस घण्टे आँख मूँदता है फिर भी दस मिनट भी अपने पक्ष में नहीं पाता। गीता में है-

      ‘परिचर्यात्मकं कर्म शूद्रस्यापि स्वभावजम।’ (१८/४४)

      जो ज्ञाता हों, तत्त्वदर्शी हों, ऐसे महापुरुषों की सेवा से योग्यता आपके अन्दर स्वतः प्रसारित हो जायेगी। विधि जागृत होने पर उत्तरोत्तर उन्नत श्रेणियों में प्रवेश मिल जाता है।

      अल्पज्ञ श्रेणी का साधक भूल करता है।
      ‘सोचिय शूद्र विप्र अवमानी।
      मुखर मान प्रिय ज्ञान गुमानी।।’
      ऐसा शूद्र शोचनीय है जो मुखर अर्थात् वाचाल (विकट प्रवक्ता), मान-सम्मान प्रिय, ज्ञान का दम्भ भरनेवाला, विप्र का अपमान करनेवाला हो। शूद्रत्व काल में ये दोष आ जाते हैं। महर्षि काकभुशुण्डि का प्रथम जन्म, जिसमें आत्मिक जागृति हुई, शूद्र-तन था। साधना में प्रवेश तो मिला लेकिन गुरुजी से द्वेष कर बैठे और अजगर होने का शाप मिला। अस्तु शूद्र भूल करता है लेकिन अन्य श्रेणियों के साधक (वैश्य, क्षत्रिय, ब्राह्मण) कभी भूल नहीं करते।

      राम के राज्य में अर्थात् भगवान् जब आत्मा से रथी हैं, उस स्थिति में जो साधना में प्रवेश पा चुका है, ऐसा साधक है तो शूद्र किन्तु शम्बूक अर्थात् समत्व की वृत्ति का आश्रय ले लेता है। वह वृक्ष से उलटा टँगा था। ‘संसार विटप नमामहे’, ‘उर्ध्वमूलमध:शाखम’- ऊपर परमात्मा जिसका मूल और कीट-पतंगपर्यन्त प्रकृति जिसकी शाखा-प्रशाखाएँ हैं, ऐसा संसार एक वृक्ष है। वह शम्बूक संसार-वृक्ष में, गर्भवास में उलटा लटका है। वह है अल्पज्ञ लेकिन स्वांग भरता है पूर्णत्व वालों का।

      शम्बूक समत्व की वृत्ति का स्वांग कर रहा है, ऐसा करने से ब्राह्मण बालक मर गया। अर्थात् हृदय में जो ब्रह्म-चिन्तन आंशिक रूप से जागृत हुआ था वह प्रसुप्त (कुण्ठित) हो गया, न जाने वह कब मर गया। ब्रह्म-चिन्तन , भजन बन्द हो गया। ऋषियों ने अनुमान लगाया किन्तु जाना नहीं। इस कमी को बाहर कोई जान नहीं सकता कि कौन ढोंगी है, कौन सही है? किन्तु राम ने उसे खोज लिया क्योंकि वह अन्तःकरण से आत्मा से रथी हैं। त्याग ही तलवार है। जहाँ भगवान् ने त्याग के द्वारा , अपौरुषेय प्रेरणा के द्वारा उसे नीचे गिराया, वह ब्राह्मण बालक जीवित हो गया। दैवी वृत्तियाँ उसमें पुनः प्रवाहित हो गयीं। देवता दुंदुभि बजाने लगे। ब्रह्मचिन्तन पूर्ववत होने लगा।

      इस रामायण में एक सींक रखने की भी जगह नहीं है जहाँ कोई प्रश्न कर सके, न ही भेदभाव है, न छुआछूत है फिर भी लोग आक्षेप करते हैं कि हमारे शम्बूक को क्यों मार दिया? भगवान् राम ने अपने जीवनकाल में जिनका उद्धार किया उनमें था केवट अधम, शबरी अधम, बानर-भालू अधम, असंख्य अपार निशाचर अधम। एक भी ब्राह्मण, एक भी क्षत्रिय को भगवान् ने नहीं तारा। रामायण में तो उल्लेख नहीं है। राम ने अपार, अरबों अधमों को तारा, एक थाली में खिलाया, उनके जूठे बेर खाये, अपने धाम भेज दिया, उनके लिए किसी ने राम को धन्यवाद तक नहीं दिया और लाखों वर्ष पूर्व कोई एक मर गया तो हाय हमारे बाबा श्री शम्बूक जी! यहाँ कहाँ रखा है उनका बाबा? यह तो योग-साधना का रूपक है।

      ||ॐ श्री परमात्मने नमः||

  10. GT says:

    This is not a lower or higher caste issue, Those who doesn’t posses knowledge are classified as shudras. Valmiki who wrote Ramayan is not classified as shudras as he is knowledgeable.
    He is doing penance to attain greater powers, This needs to be done because Power without knowledge is destructible. As we are seeing problems with the Terrorist in current day life

  11. Eshwar says:

    This is arose as Uttarakhand and Valmiki did not mentioned anything about Shabooka in all his 24,000 shlokas / versus. Subsequent writers narrated many stories in different ways where there is no evidence. Valmiki Ramyana is more authenticated as Valmiki was contemporary during that period. We can not conclude anything without a clear evidence. So let us invest our time on other issues where we can generate some positive energy together.