Dubri Satam Vrat Katha in Hindi | दुबड़ी सातें, दुबड़ी सप्तमी व्रत कथा

भाद्रपद शुक्ला सप्तमी को दुबड़ी सप्तमी के नाम से मनाया जाता है| यह त्योहार राजस्थान में मुख्य रूप में मनाया जाता है| जिस दिन महिलाएं अपने संतान की मंगल कामना के लिए व्रत करती है तथा दुबड़ी माता की पूजा करते हैं| जिस दिन एक पाटे पर कुछ बच्चों (दुबड़ी) की मूर्ति, सर्पों की मूर्ति, एक मटका और एक औरत का चित्र मिट्टी से बना लिया जाता है| उनको चावल, जल, दूध, रोली, आटा, घी और चीनी मिलाकर लोई बनाकर उनसे पूजा जाता है| मोठ बाजरे का बायना निकालकर सासुजी के पैर छूकर उन्हें दिया जाता है| फिर दुबड़ी की कथा का श्रवण किया जाता है|

दुबड़ी सातम व्रत कथा

एक साहूकार के सात बेटे थे, परंतु वह जिस भी बेटे का विवाह करता, वही मर जाता| इस प्रकार उसके 6 बेट क्रमशः मर गए| अंत में सातवें बेटे का भी विवाह तय हो गया| सभी नाते रिश्तेदारों को आमंत्रित किया गया| विवाह में शामिल होने के लिए लड़के की बुआ भी आ रही थी| रास्ते में उसे एक बुढ़िया मिली| बुआ ने बुढ़िया के चरण स्पर्श किए तो उसने पूछा की बेटी कहां जा रही हो? बुआ के बताए जाने पर उड़िया ने कहा कि लड़का तो मर जाएगा| वह जैसे ही बारात के लिए घर से निकलेगा, घर का दरवाजा गिर जाएगा| यदि उससे बचेगा तो भी जिस पेड़ के नीचे बारात रुकेगी, वहां पेड़ गिर जाएगा, वहां से बचने पर जब वहां ससुराल में प्रवेश करेगा तो वहां का भी दरवाजा गिर जाएगा, उससे भी यदि बच गया तो सातवी भावर पढ़ते समय नाग आकर डस लेगा|

बुआ बोली – हे माता, मेरा यह एक ही भतीजा बचा है, जब आपने इतने अनस्टो की बात बताई है, तो कृपा करके रक्षा का उपाय भी बताएं| गुड़िया जो स्वयं दुबड़ी माता थी, बोली – बेटी, उपाय तो है, पर है बहुत कठिन| बुआ ने कहा – माता कितना भी कठिन उपाय हो भतीजे की रक्षा के लिए मैं करूंगी | बुढ़िया बोली – बेटी, जब लड़का विवाह करने जाने लगे तो उसे दरवाजे से न निकालकर दीवार फोड़ कर निकलवाना, उसके बाद रास्ते में किसी पेड़ के नीचे बरात को रुकने न देना, इसी प्रकार ससुराल में भी लड़के को दीवार पढ़कर ही घर में प्रवेश करना तथा भाँवरों के समय में कटोरे में दूध भरकर रख देना, जब नागा कर दूध पीने लगे तो उसको तांतके फाँस के फँसा लेना|

जब नागिन आकर अपने नाग को मांगे तो तुम उससे अपने छहो भतीजे को मांग लेना | इस तरह तुम्हारा यह भतीजा तो जीवन बच ही जाएगा, पहले मरे हुए भतीजे भी जीवन हो जाएंगे, परंतु इस बात को किसी से बताना नहीं अन्यथा सुनने और कहने वाले दोनों मर जाएंगे और भतीजे की भी मृत्यु हो जाएगी |

बुढ़िया बनी दो बड़ी माता ने जैसे कहा था, मायके आकर बुआ ने वैसे ही किया| सभी घटनाएं दो घड़ी माता ने जैसे बताई थी वैसे ही घटी, परंतु रक्षा का उपाय बता देने के कारण भतीजे की रक्षा हो गई और पहले मर चुके छहो भतीजे भी जीवन हो गए| बड़ी माता की कृपा से सब कुछ आनंदमय हो गया| बरात लौटने पर बुआ ने सप्तमी को दुबड़ी माता की पूजा करवाई|

हे दुबड़ी मैया, जैसे तुमने बुआ को सातों भतीजे दिए, वैसे ही सभी को संतान सुख देना |

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