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कैसे करे दुर्गा सप्तशती पाठ | दुर्गा सप्तशती की पाठ विधि | नौ दिन में एक दुर्गा पाठ | संक्षिप्त दुर्गा पाठ

आप की मनोकामनाएं कैसे पूरी हो सकती है? हम सब की मन में एक इच्छा रहती है की कोई आके हमें ऐसी उपाय बताये की उससे हमारे सभी कामनाये पूरी होजाये| दुर्गा सप्तशती पाठ एक ऐसी ही महत्त्व उपाय है इसे पाठ करने से हमारे सभी कामनाये तुरंत पूरी हो सकती है| दुर्गा सप्तशती पाठ के लिए आश्विन शरद नवरात्री एक महत्वपूर्ण समय है| हमारे पूर्वजों के द्वारा दुर्गासप्तशती पाठ करने के लिए एक नियमित विधि स्तापित की गयी है|

दुर्गा सप्तशती की पाठ विधि

दुर्गा सप्तशती की पाठ विधि कई तरह की जाती है| कामना विशेष के अनुसार कई प्रकार से माँ दुर्गा के पाठ किये जाते है| छोटे काम के लिए जहा संक्षिप्त पाठ किया जाता है, वही बड़े कार्य की सिद्धि के लिए सम्पुट सहित दुर्गासप्तशती का पाठ करने की विधि भी प्रचलित है| संक्षिप्त पाठ करने में अधिकतम समय तीन मिनट लगता है, तो सम्पुट सहित पाठ करने में लगभग साढ़े तीन घंटे लगते है| साधक अपनी कामना के आकार-प्रकार तथा प्रतिदिन उपलब्ध समय के आधार पर दुर्गा पाठ की विधि का चयन कर सकता है| यहाँ पर सूक्ष्म पाठ से बृहद पाठ तक का विवेचन किया जा रहा है|

सम्पुट जप

अपनी कामना से सम्बंदित सम्पुट मंत्र की साधक की सुविधा के अनुसार एक माला प्रातः अथवा सायंकाल अथवा दो समय जप किये जाते है|

सप्तश्लोकी दुर्गा पाठ

इस विधि में दुर्गासप्तशती के देवी कृपा से सम्बंदित सात श्लोकों का पाठ किया जाता है| दो अन्य मंत्र एवं विनियोग मिलाकर इस विधि का संपूर्ण रूप बनता है| कामना के अनुसार चयनित सम्पुट की एक माला का जप सप्तश्लोकी दुर्गापाठ के पूर्व तथा पश्चात किया जाता है|

देवीसूक्त पाठ

दुर्गासप्तशती में पंचम अध्याय के मन्त्र संख्या ९ से ८२ तक (नामदेव्यै महादेव्यै से सर्वआपदो भक्ति विनम्रमूर्तिभिः तक) देवीसूक्त है| अभीष्ट सम्पुट का प्रथम मन्त्र के पूर्व एक बार और इसके पश्चात प्रत्येक मन्त्र के बाद दो-दो बार सम्पुट मन्त्र का पाठ करें तथा अंतिम मन्त्र के पश्चात केवल एक ही बार सम्पुट का पाठ करें| इस प्रकार सम्पुट सहित देवीसूक्त का पाठ होता है| पाठ आरम्भ करने से पूर्व शिखा बंधन, आचमन, प्राणायाम, पवित्रीकरण, संक्षिप्त गणेश, षोडश मातृका, नवग्रह, त्रिदेव त्रिशक्ति का नाम मन्त्र से पूजन करके पाठ करें| अंत में जप, निवेदन, क्षमा एवं प्रार्तना करें|

नौ दिन में एक दुर्गा पाठ

समयाभाव के कारण प्रतिदिन सम्पूर्ण दुर्गापाठ करना संभव नहीं हो, तो नौ दिन में पाठ्क्रम इस प्रकार है:
१. प्रथम दिन : कवच एवं अर्गला स्तोत्रम
२. द्वितीय दिन : कीलका, रात्रिसूक्त और देवी अथर्वशीर्षम
३. तृतीय दिन : नवार्ण विधि और प्रथम चरित्र
४. चतुर्थ दिन : द्वितीय अध्याय से चतुर्थ अध्याय तक (माध्यम चरित्र)
५. पंचम दिन : पंचम अध्याय से त्रयोदश अध्याय तक (उत्तर चरित्र) एवं नवार्ण जप|
इस अध्याय का विभाजन आधा चरित्र का पाठ नहीं करना चाहिए, ऐसा करने से जप्छिद्र हो जाता है, विधान को ध्यान में रखकर किया गया है|
षष्ट दिन : प्राधानिक रहस्य, वैकृतिक रहस्य और मूर्ति रहस्य पाठ|
सप्तम दिन : दुर्गा अष्टोत्तरनाम स्तोत्र एवं दुर्गा द्वात्रिंशत्नाम माला
अष्टम दिन : सिद्धकुंजिका स्तोत्रम पाठ एवं देव्यपराधा क्षमापन स्रोत्रपाठ|
नवम दिन : देवीसूक्त से हवं एवं क्षमा प्रार्तना|

संक्षिप्त दुर्गा पाठ
जो लोग प्रतिदिन घंटे-डेढ़ घंटे का समय दुर्गा पाठ के लिए दे सकते है, उनके लाभार्थ यहाँ समसखीपत दुर्गा पाठ दिया जा रहा है| यह प्रतिदिन के हिसाब से नवरात्र के नौ दिनों तक किया जा सकता है|

पाठों का क्रम इस प्रकार है :
१. कवच. २. अर्गला स्तोत्रम. ३. कीलका स्तोत्रम ४. नवार्ण विधि. ५. रात्रिसूक्त पाठ ६. शक्रादिस्तुति पाठ : चतुर्थ अध्याय के ‘शक्रादयः सरगना’ से मन्त्र संख्या २७ ‘खड़गे शूलगदा… तैरस्मानु रक्ष सर्वतः’ तक. ७. नारायणी स्तुतिः एकादश अध्याय के मन्त्र ३ ‘देवी प्रपन्नार्तिहरे से मन्त्र संख्या ३५ ‘लोकानां वरदा भव’ तक, ८. देवीसूक्त पंचम अध्याय से नवम मंत्र ‘नामदेव्यै महादेव्यै से मन्त्र संख्या ८२ के ‘सर्वापदो भक्ति विनम्रमूर्तिभिः’ तक, ९. प्रथम तीनों अध्याय एवं नवार्ण मंत्र जप, १०. सप्तश्लोकी दुर्गापाठ, ११. सिद्धकुंजिका स्तोत्रम, १२. देव्यथर्वशीर्ष पाठ, १३. देव्यपराध क्षमापन एवं क्षमा प्रार्तना|

सामान्य दुर्गासप्तशती पाठ
इसकी दो विधि है:
१. प्रथम विधि:
इस विधि में प्रथम दिवस से नवम दिवस तक कवच, अर्गला, कीलका, नवार्ण मंत्र जप सहित त्रयोदश अध्यायों का पाठ तथा क्षमापनादि किये जाते है| इसे षडंग पाठ भी कहते है|
२. दूसरी विधि:
इस विधि में प्रथम दिवस कवच, अर्गला, कीलका पाठ तथा अंतिम दिन पाठ समाप्त होने पर रहस्यत्रय पाठ, क्षमापनादि पाठ तथा शेष सारे दिन नवदिन तक नवार्ण मन्त्र जप तथा तेरह अध्यायों का पाठ तथा नवार्ण मंत्रपूर्वक क्षमा प्रार्तना आदि की जाती है|

सम्पुट सहित दुर्गासप्तशती पाठ

इस विधि में मूल पाठ से पूर्व कवच, अरगलादि तथा मूल पाठ के पश्चात रहस्यादि सब-कुछ सामान्य दुर्गासप्तशती पाठ के समान ही किये जाते है| विशेषता केवल यह रहती है की प्रत्येक मन्त्र के साथ सम्पुट मन्त्र का उच्चारण किया जाता है| सम्पुट विधि में प्रत्येक मन्त्र के साथ पहले और बाद में सम्पुट मन्त्र बोलै जाता है अर्थात अध्याय के आरम्भिक मन्त्र से पूर्व एक बार तथा प्रत्येक मन्त्र के बाद दो बार तथा अंतिम मन्त्र के बाद एक बार सम्पुट बोला जाता है|

दुर्गासप्तशती विलोम पाठ

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