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ग्रहण में स्नान, भोजन आदि के नियम | Grahan Snan Niyam in Hindi

चंद्र ग्रहण / सूर्य ग्रहण दोनों राहु से ग्रस्त हुए अस्त हो जाये तो पुनः उनका दर्शन करके स्नान और भोजन करना चाहिए | भोजन अपने घर का करें | ग्रहण के समय में दिन-रात दोनों में भोजन निषिद्ध है |

चन्द्रमा राहुग्रस्त उदित होते हों तो प्रथम दिन भोजन न करें | चन्द्रमा के प्रातःकाल ग्रहण से ग्रसित हो जाने पर प्रथम रात्रि तथा अगले दिन का भोजन निषिद्ध है ; किन्तु स्नान-हवं आदि मोक्ष समय से किया जा सकता है |

ग्रहण के एक प्रहार पहले बालक, वृद्धि और रोगी भी भोजन न करें | बेध या ग्रहण-काल में कुछ भी नहीं खाना चाहिए | ग्रहण में सभी वर्णों को सूतक लगता है –

“सर्वेषामेव वर्णानां सुटकाम राहुदर्शाने |”

दूध, दही, घी में पका अन्न और मणि में रखा जल टिल या कुश डालने पर उपवित्र नहीं होते | हाँ, सबके लिये जप आदि का विधान और शयन आदि का निषेध अवश्य है |

ग्रहण के दिन, ग्रह औषधि विधि से स्नान करना चाहिए | सूर्य ग्रहण के दिन सूर्य से सम्बन्धित जड़ी-बूटी एवं चंद्र ग्रहण के दिन चन्द्रमा से सम्बन्धित जड़ी-बूटी का उपयोग करना चाहिए | ग्रहण से पूर्व एवं पश्चात भी स्नान करना चाहिए |

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1 Comments

  1. Shailindra Kumar Yadav says:

    Sur garaha kiss tarik ko ho ga