कार्तिक मॉस माहात्म्य, अध्याय – 1 | Hindi – Kartik Maas Mahatmya – 1st Chapter

नैमिषारण्य तीर्थ में श्रीसूतजी ने अठ्ठासी हजार शौनकादि ऋषियों से कहा – अब मैं आपको कार्तिक मास की कथा विस्तारपूर्वक सुनाता हूँ, जिसका श्रवण करने से मनुष्य के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और अन्त समय में वैकुण्ठ धाम की प्राप्ति होती है. सूतजी ने कहा – श्रीकृष्ण जी से अनुमति लेकर देवर्षि नारद […]

कार्तिक मॉस माहात्म्य, अध्याय – 2 | Hindi – Kartik Maas Mahatmya Katha – 2nd Chapter

भगवान श्रीकृष्ण आगे बोले – हे प्रिये! जब गुणवती को राक्षस द्वारा अपने पति एवं पिता के मारे जाने का समाचार मिला तो वह विलाप करने लगी – हा नाथ! हा पिता! मुझको त्यागकर तुम कहां चले गये? मैं अकेली स्त्री, तुम्हारे बिना अब क्या करूँ? अब मेरे भोजन, वस्त्र आदि की व्यवस्था कौन करेगा. […]

कार्तीक मॉस माहात्म्य, अध्याय 13 | Hindi – Kartik Maas Mahatmya Katha 13th Chapter

दोनो ओर से गदाओं, बाणों और शूलों आदि का भीषण प्रहार हुआ. दैत्यों के तीक्ष्ण प्रहारों से व्याकुल देवता इधर-उधर भागने लगे तब देवताओं को इस प्रकार भयभीत हुआ देख गरुड़ पर चढ़े भगवान युद्ध में आगे बढ़े और उन्होंने अपना सारंग नामक धनुष उठाकर बड़े जोर का टंकार किया. त्रिलोकी शाब्दित हो गई. पलमात्र […]

कार्तीक मॉस माहात्म्य, अध्याय 12 | Hindi – Kartik Maas Mahatmya Katha 12th Chapter

नारद जी कहने लगा – तब इन्द्रादिक देवता वहाँ से भय-कम्पित होकर भागते-भागते बैकुण्ठ में विष्णु जी के पास पहुंचे. देवताओं ने अपनी रक्षा के लिए उनकी स्तुति की. देवताओं की उस दीन वाणी को सुनकर करुणा सागर भगवान विष्णु ने उनसे कहा कि हे देवताओं! तुम भय को त्याग दो. मैं युद्ध में शीघ्र […]

कार्तिक मॉस माहात्म्य, अध्याय 11 | Hindi – Kartik Maas Mahatmya Katha 11th Chapter

सागर पुत्र जलन्धर अपनी पत्नी वृन्दा सहित असुरों से सम्मानित हुआ सभा में बैठा था तभी गुरु शुक्राचार्य का वहाँ आगमन हुआ. उनके तेज से सभी दिशाएँ प्रकाशित हो गई. गुरु शुक्राचार्य को आता देखकर सागर पुत्र जलन्धर ने असुरों सहित उठकर बड़े आदर से उन्हें प्रणाम किया. गुरु शुक्राचार्य ने उन सबको आशीर्वाद दिया. […]

कार्तिक मॉस माहात्म्य, अध्याय – 9 | Hindi – Kartik Maas Mahatmya Katha – 9th Chapter

राजा पृथु ने कहा – हे मुनिश्रेष्ठ नारद जी! आपने कार्तिक माह के व्रत में जो तुलसी की जड़ में भगवान विष्णु का निवास बताकर उस स्थान की मिट्टी की पूजा करना बतलाया है, अत: मैं श्री तुलसी जी के माहात्म्य को सुनना चाहता हूँ. तुलसी जी कहां और किस प्रकार उत्पन्न हुई, यह बताने […]

कार्तिक मॉस माहात्म्य, अध्याय – 8 | Hindi – Kartik Maas Mahatmya Katha – 8th Chapter

नारदजी बोले – अब मैं कार्तिक व्रत के उद्यापन का वर्णन करता हूँ जो सब पापों का नाश करने वाला है. व्रत का पालन करने वाला मनुष्य कार्तिक शुक्ला चतुर्दशी को व्रतव की पूर्ति और भगवान विष्णु की प्रीति के लिए उद्यापन करे. तुलसी के ऊपर एक सुन्दर मण्डप बनवावे, उसे केले के खम्भों से […]

कार्तिक मॉस माहात्म्य, अध्याय – 10 | Hindi – Kartik Maas Mahatmya Katha – 10th Chapter

राजा पृथु बोले – हे ऋषिश्रेष्ठ नारद जी! आपको प्रणाम है. कृपया अब यह बताने की कृपा कीजिए कि जब भगवान शंकर ने अपने मस्तक के तेज को क्षीर सागर में डाला तो उस समय क्या हुआ? नारद जी बोले – हे राजन्! जब भगवान शंकर ने अपना वह तेज क्षीर सागर में डाल दिया […]

कार्तिक मॉस माहात्म्य, अध्याय – 7 | Hindi – Kartik Maas Mahatmya Katha – 7th Chapter

नारद जी ने कहा – हे राजन! कार्तिक मास में व्रत करने वालों के नियमों को मैं संक्षेप में बतलाता हूँ, उसे आप सुनिए. व्रती को सब प्रकार के आमिष मांस, उरद, राई, खटाई तथा नशीली वस्तुओं का त्याग कर देना चाहिए. व्रती को दूसरे का अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिए, किसी से द्वेष नहीं […]

कार्तिक मॉस माहात्म्य, अध्याय – 6 | Hindi – Kartik Maas Mahatmya Katha – 6th Chapter

नारद जी बोले – जब दो घड़ी रात बाकी रहे तब तुलसी की मृत्तिका, वस्त्र और कलश लेकर जलाशय पर जाये. कार्तिक में जहां कहीं भी प्रत्येक जलाशय के जल में स्नान करना चाहिए. गरम जल की अपेक्षा ठण्डे जल में स्नान करने से दस गुना पुण्य होता है. उससे सौ गुना पुण्य बाहरी कुएं […]

कार्तिक मॉस माहात्म्य, अध्याय – 5 | Hindi – Kartik Maas Mahatmya Katha – 5th Chapter

राजा पृथु बोले – हे नारद जी! आपने कार्तिक मास में स्नान का फल कहा, अब अन्य मासों में विधिपूर्वक स्नान करने की विधि, नियम और उद्यापन की विधि भी बतलाइये. देवर्षि नारद ने कहा – हे राजन्! आप भगवान विष्णु के अंश से उत्पन्न हुए हैं, अत: यह बात आपको ज्ञात ही है फिर […]

कार्तिक मॉस माहात्म्य, अध्याय – 3 | Hindi – Kartik Maas Mahatmya Katha – 3rd Chapter

सत्यभामा ने कहा – हे प्रभो! आप तो सभी काल में व्यापक हैं और सभी काल आपके आगे एक समान हैं फिर यह कार्तिक मास ही सभी मासों में श्रेष्ठ क्यों है? आप सब तिथियों में एकादशी और सभी मासों में कार्तिक मास को ही अपना प्रिय क्यों कहते हैं? इसका कारण बताइए. भगवान श्रीकृष्ण […]

कार्तिक मॉस माहात्म्य, अध्याय – 4 | Hindi – Kartik Maas Mahatmya Katha – 4th Chapter

नारदजी ने कहा – ऎसा कहकर भगवान विष्णु मछली का रूप धारण कर के आकाश से जल में गिरे. उस समय विन्ध्याचल पर्वत पर तप कर रहे महर्षि कश्यप अपनी अंजलि में जल लेकर खड़े थे. भगवान उनकी अंजलि में जा गिरे. महर्षि कश्यप ने दया कर के उसे अपने कमण्डल में रख लिया. मछली […]