पुत्र प्राप्ति के आयुर्वेदिक मेडिसिन | Putra Prapti ke Ayurvedic Medicine

पुत्र प्राप्ति के आयुर्वेदिक मेडिसिन | Putra Prapti Ke Ayurvedic Medicine, संतान प्राप्ति के लिए कई तरह के आयुर्वेदिक दवाईया मार्किट में उपलब्ध है..

संतान सुख सभी दंपत्ति चाहते है और सभी दम्पत्ति ये भी चाहते है कि उनके घर में कम से कम एक लड़का और लड़की दोनो ही ताकि उनका परिवार पूरा हो सके और वह पुत्र व पुत्री सुख दोनो का आनन्द उठा सके। ऐसे कई दम्पत्ति हमें दिख जाते हैं जिनको या तो पुत्र ही होते हैं अथवा पुुत्रियां ऐसे दंपत्ति अपने परिवार को जल्द से जल्द पूर्ण करने के उपाये खोजते रहते है। आयुर्वेदिक शास्त्र में ऐसे कई उपाय बताये गये है जिनको अपना कर हम अपने परिवार को पूर्ण कर सकतंे है अर्थात हम पुत्र व पुत्री दोनो के सुखों का आनन्द ले सकते है।

स्त्रियों का गर्भ न धारण करने के वैसे तो कई कारण हो सकते है परन्तु यदि स्त्री व पुरूष के बच्च पैदा करने के हार्मोन्स यदि एक्टिव न हो तो भी यह समस्या दंपत्तियों का हो सकती है इसके अतिरिक्त यदि महिला व पुरूष यदि ठीक समय पर सम्भोग नहीं करते तो भी उन्हें यह समस्या हो सकती है। इन समस्याओं में छुटकारा पाने के लिए भी आयुर्वेद में अद्भुत दवाई है। आज हम आपको ऐसे आयुर्वेदिक मेडिसिन बताने जा रहे है जिनके इस्तेमाल से दंपत्ति को पुत्र की प्राप्ति हो सकती है।

पुत्र प्राप्ति के आयुर्वेदिक मेडिसिन

1. पुत्र प्रात्ति का सबसे आसान दवाई आर्युवेद में बताई गयी है सूरज मुखी के बीज को। सूरज मुखी का बीज एक ऐसा बीज है जो अपने में विटामिन ई. की मात्रा अत्याधिक रखता है। तो अगर आप इसको खाते हैं तो यह आपमें स्पर्म की मात्रा बढ़ा देता है साथ साथ इसमें यह भी गुण होता है कि यह आपमें पुत्र पैदा करने वाले शुक्राणु पैदा करता है। यह सबसे सरल उपाय है पुत्र पैदा करने का। आपको सिर्फ सूरज मुखी के बीज को खाना है।

2. कैलावास फल एक ऐसा फल है जो पुत्र प्राप्ति के काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। यदि आप इस फल की 50 ग्राम मात्रा (कच्चे फल की) का प्रतिदिन 3 महीने तक सेवन करते हैं तो आप निश्चित ही पुत्र को पानेे में सफल हो सकते।

3. अश्वगंधा को आयुर्वेद में बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है इसका प्रयोग कहीं तरह की दवाई को मनाने तथा कई बीमारियों कोे दूर करने में किया जाता है। यह पुत्र प्राप्ति के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। पुत्र प्राप्ति के लिए हमें सबसे पहले अश्वगंधा की जड़ों के चूरन की आवयश्यकता होगी हैै। अव इस चूरन की 25 ग्राम मात्रा को आधे लीटर पानी में डालेगें। और फिर इसको उबलने के लिए गैस पर रख देगें। जब इस घोल का एकचैथाई हिस्सा वर्तन में रह जाये तब इसमें 100 मिलीलीटर दूध मिला ले और तब तक उवलने दे जव तक कि यह आधा न हो जाये। अब हम इसे गैस से उतार लेगें और किसी साफ वर्तन में रख लेगें। अब हमें 30 मिली लीटर मात्रा इस मिश्रण की एक चम्मच घी के साथ सुबह को तीन माह तक सेवन करते रहना है। इस उपाय को करने के लिए विकित्सीय परामर्श आवश्यक है।

इन आयुर्वेदिक उपाओं को अपनाने से आपकी पुत्र प्राप्ति की अभिलाषा ईश्वर के आशीष शीघ्र ही पूरी हो सकती है।

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