पुराणों का वर्णन Sheetala माता भगवान ब्रह्मा के द्वारा बनाई गई हो. भगवान ब्रह्मा उससे वादा किया था कि वह धरती पर पूजा किया जाएगा, लेकिन वह दाल के बीज लेकर की जरूरत है. वह अपने साथी के रूप में Jvara Asura (बुखार दानव), जो भगवान शिव के पसीने से बनाया गया था के लिए कहा.
Sheetala माता की कहानी का वर्णन है कि Sheetala और Jvara जब Devaloka में रहे उन्हें सर पर यात्रा और दाल जाया करते थे जहां वे गए थे. ये दाल चेचक रोगाणु और सब बदल गया बीमारी है. उनमें से परेशान कहा देवताओं उसे कहीं वह कहाँ की उपासना है और जाने के लिए.
दोनों पृथ्वी पर आया था. राजा Birat उस समय सत्तारूढ़ था. राजा की पूजा के लिए तैयार हो उसे और उसके राज्य में उसे जगह दे दी. उन्होंने कहा कि वह भगवान शिव के रूप में ही सम्मान नहीं मिलेगा. यह किया और वह उसे गुस्से में चेचक के प्रसार शुरू कर दिया. उसकी शक्ति देखकर राजा आत्मसमर्पण कर दिया और उसके कि पृथ्वी के निवासियों की पूजा करेंगे वादा किया था उसे चैत्र Ashtami के दिन पर. माँ Sheetala खुश और वरदान दे दिया है कि उन सभी पूजा जो उसे महामारी रोग प्रतिरक्षा जाएगा और एक लंबी स्वस्थ जीवन जीने बन गया.
मेष राशि या मेष राशि पर हस्ताक्षर हिंदू ज्योतिष में 12 राशियों के बीच पहली राशि है. मेष Rasi अश्विनी नक्षत्र, भरनि Nakshatram, और Krittika 1 pada नक्षत्र शामिल है. वर्ष 2010 आपके लिए एक अच्छा साल है और तुम गवाह या अनुभव बहुत अच्छा बदलाव के लिए कर सकते हैं. तुम, मेष Rasi मूल निवासी, रचनात्मकता और आत्म सुधार वर्ष के रूप में विश्वास करेंगे शिक्षा, कैरियर के रूप में आप से सर्वश्रेष्ठ बाहर लाता है, और सामाजिक जीवन. एक मुद्दा है जो आप के साथ कुछ वर्षों से पीड़ित हैं इस साल का समाधान हो जाएगा.
2010 में मेष राशि मूल निवासी के लिए हाइलाइट्स – मेजर भविष्यवाणियों 2010 मेष राशि के लिए:
* अप्रैल, मई और, एक नया रिश्ता जून तुम सुखद एहसास देता है और आपको अधिक खुश करता है.
2010 * मेष राशि के अविवाहित मूल निवासी के लिए एक अच्छा वर्ष रहा है.
दूसरी तिमाही (अप्रैल, मई और जून) * 2010 में आपके स्वास्थ्य के लिए एक अच्छा समय होगा.
* आप अच्छे रिटर्न और अच्छे 2010 में वित्तीय लाभ की उम्मीद कर सकते हैं.
* पहली तिमाही (जनवरी, फरवरी और मार्च) 201o में बहुत से नए उद्यम शुरू अच्छा होगा. नया कुछ भी शुरुआत 2010 की पहली तिमाही में मेष Rasi मूल निवासी के लिए बहुत लाभदायक होगा.
* अंतिम तिमाही (अक्टूबर, नवम्बर एवं दिसम्बर) 2010 में कानूनी प्रसंस्करण और कानूनी मुद्दों के खबरदार. अपने दुश्मन या प्रतिद्वंद्वियों आप अपने कैरियर के मोर्चे पर हमला हो सकता है.
* कुल मिलाकर, मेष राशि 2010 के मूल निवासी एक अच्छा वर्ष की उम्मीद कर सकते हैं. अप्रत्याशित वित्तीय लाभ और खुशी के पल अपने जीवन भर देगी.
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जनवरी २०१० माघ मॉस
सोमवार ११ जनवरी :- ( सर्वार्थ सिद्धि योग समय 7 :17 AM से 20 :20 PM )नारदजी युधिशठिर से बोले :-
द्वादशी तिथि जो अनुराधा नक्षत्र ( अनुराधा नक्षत्र रात्रि ८:४४ मं तक -दिल्ली ) से युक्त हो उसको पितरो का श्राद्ध करने योग्य एवं श्रेष्ठ है ये समय श्राद्ध के लिए ही नहीं अपितु सभी पुण्य कर्मो के लिए उपयोगी है
ये कल्याण की साधना के उक्युक्त और शुभ की अभिवृद्धि करने वाला है | इस अवसर पर अपनी पूरी शक्ति लगा कर शुभ कर्म करने चाहिए इसी में जीवन की सफलता है | इस शुभ अवसर पर जो स्नान , जप , होम , व्रत तथा देव एवं ब्राह्मणों की पूजा की जाती है तथा जो कुछ देवता , पितरो एवं मनुष्यों को समर्पित किया जाता है उसका फल अक्षय होता है. ( श्रीमद भगवत महापुराण सप्तम स्कन्द )
वीरवार १४ जनवरी :- सूतजी ने कहा :- माघ मॉस कृष्ण चतुर्दशी को की हुई शिव जी की पूजा संपूर्ण अभिष्ठ फल देने वाली है|इस दिन की हुई शिव पूजा मनुष्यों की आयु बढाती , मृत्यु के कष्ट को दूर हटाती और समस्त सिद्धियों की प्राप्ति कराती है | ( शिव पुरान -विश्वेश्वर संहिता )
वेदव्यास जी ने वैशम्पायन जी के पुच्छने पर कहा :- माघ मॉस की मकर सक्रांति में सूर्योदय से पहले स्नान करना चाहिए इससे दस हज़ार गों दान का फल प्राप्त होता है |उस समय किया हुआ तर्पण , दान और देव पूजन अक्षय होता है |( पद्मा पुरान – सृष्टि खंड )
शुक्रवार १५ जनवरी :- माघ मॉस के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को सूर्योदय के पहले जो जल और तिल से पितरो का तर्पण करता है वेह स्वर्ग में अक्षय सुख भोगता है | ब्राह्मणों को भोजन के योग्य उत्तम अन्न देने से भी अक्षय स्वर्ग की प्राप्ति होती है | जो उत्तम ब्राह्मण को अनाज , वस्त्र और घर अदि दान में देता है उसे लक्ष्मी कभी नहीं छोडती |
( पद्मा पुरान – सृष्टि खंड )
सोमवार १८ जनवरी :- माघ मॉस के शुक्ल पक्ष की तृतीय को मन्वंतर तिथि कहते है उस दिन जो कुच्छ दान दिया जाता है उसका फल अक्षय बताया गया है | ( पद्मा पुरान – सृष्टि खंड )
भगवती गौरी ने धर्मराज से कहा :- माघ मॉस की तृतीय को गुड और लावन का दान इस्त्रीयो एवं पुरुषो के लिए अत्यंत श्रेयस्कर है | भगवन शंकरकी प्रिये उस दिन मोदक एवं जल का दान करे | ( भविष्य पुरान अध्याय-२१ )
मंगल वार १९ जनवरी:- सुमन्तु मुनि ने कहा :- माघ मॉस की शुला चतुर्थी को शांता कहते है | ये शांता तिथि नित्य शांति प्रदान करने के कारन शांता कहलाती है| इस दिन किये हुए स्नान दान अदि सत्कर्म गणेशजी की कृपा से १००० गुना फल दायक हो जाते है| इस शांता तिथि को उपवास कर गणेशजी का पूजन तथा हवन करे और लावन , गुड और शाक ब्राह्मणों को दान में दे | विशेष कर इस्त्रीया अपने ससुर अदि पूज्य जानो का पूजन करे एवं उन्हें भोजन कराये इस व्रत को करने से अखंड सौभाग्य प्राप्त होता है और सभी विघ्न दूर होते है और गणेशजी की कृपा प्राप्त होती है | किसी भी महीने की भोमवार युक्त शुक्ला चतुर्थी को सुखा कहते है यह व्रत इस्त्रीयो को सौभाग्य उत्तम रूप और सुख देने वाला है | भगवन शंकर एवं माता पारवती के संयुक्त तेज से भूमि द्वार रक्य्त वर्ण के मंगल की उत्पत्ति हुई थी | भूमि का पुत्र होने से भौम कहलाया और कु , रक्त , अंगरक् अदि नमो प्रसिद्ध हुआ | वेह शारीर के अंगो की रक्षा करने वाला और सौभाग्य देने वाला है इसलिए अंगरक् कहलाया | जो इस्त्री एवं पुरुष भोमवार युक्त शुक्ला चतुर्थी को उपवास प्रथम गणेशजी की
तदनंतर रक्त चन्दन और रक्त पुष्पों से भौम का पूजन करते है उनके सौभाग्य, उत्तम रूप एवं संपत्ति की प्राप्ति होती है | ( भविष्य पुरान )
शुक्रवार २२ जनवरी ( सर्वार्थ सिद्धि योग समय 7 :15 ऍम से 22 :51 PM ):- नारदजी युधिशठिर से बोले :-
माघ शुक्ला सप्तमी पितरो का श्राद्ध करने योग्य एवं श्रेष्ठ है ये समय श्राद्ध के लिए ही नहीं अपितु सभी पुण्य कर्मो के लिए उपयोगी है ये कल्याण की साधना के उक्युक्त और शुभ की अभिवृद्धि करने वाला है | इस अवसर पर अपनी पूरी शक्ति लगा कर शुभ कर्म करने चाहिए इसी में जीवन की सफलता है | इस शुभ अवसर पर जो स्नान , जप , होम , व्रत तथा देव एवं ब्राह्मणों की पूजा की जाती है तथा जो कुछ देवता , पितरो एवं मनुष्यों को समर्पित किया जाता है
उसका फल अक्षय होता है. ( श्रीमद भगवत महापुराण – सप्तम स्कन्द )
सोमवार २५ जनवरी :- कृत्तिका नक्षत्र से युक्त सोमवार को की हुई भगवान शिव की पूजा मनुष्यों के महान दारिद्र्य को मिटाने वाली और संपूर्ण संपतियों को देने वाली है | ( शिव पुरान -विश्वेश्वर संहिता )
(This article is contributed by Mr. Aman Jindal… Hindupad thanking him for his contribution and expecting more articles and wishes from him).